ग्राम पंचायत कोरमी सरपंच सुंदरी धुरी के खिलाफ फर्जी जाति प्रमाण पत्र का आरोप…. एसडीएम साहब का आदेश चर्चा का विषय , 11 माह में 9 पेशी तब आया साहब को होश, आदेश में कहा याचिकाकर्ता ने प्रतिभूत राशि नहीं किया जमा
ग्राम पंचायत कोरमी सरपंच सुंदरी धुरी के खिलाफ फर्जी जाति प्रमाण पत्र का आरोप….
एसडीएम साहब का आदेश चर्चा का विषय , 11 माह में 9 पेशी तब आया साहब को होश, आदेश में कहा याचिकाकर्ता ने प्रतिभूत राशि नहीं किया जमा
न्यूज़ छत्तीसगढ़ टुडे (संतोष साहू)
बिलासपुर – जनपद पंचायत बिल्हा के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत कोरमी सरपंच सुंदरी धुरी कि जाति के खिलाफ अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) बिलासपुर के समक्ष लिखित शिकायत किया गया. जिसके बाद मामले में 11 महीना में 9 पेशी याचिकाकर्ता द्वारा अटेंड किया गया. फिर साहब को अचानक याद आया कि इस फाइल में प्रतिभूत राशि जमा नहीं किया गया है. जिसके बाद साहब के द्वारा आदेश पारित करते हुए अर्जी याचिका को खारिज कर दिया गया. जो इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है.
छत्तीसगढ़ प्रदेश में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में सरकार है. वह आदिवासी वर्ग से ताल्लुक रखते हैं. लेकिन दुर्भाग्य की बात यह है कि उनके नेतृत्व में आदिवासियों को अब भी न्याय के लिए भटकना पडता है. यह बात लोग भली भांति जान रहे हैं. ओरिजिनल आदिवासी के हक अधिकार को दूसरे वर्ग के लोग फर्जी जाति प्रमाण पत्र बनाकर फर्जी तरीके से शासकीय जगह, एवं अन्य जगहों पर लाभ ले रहे है. ऐसे गंभीर मामलों में शिकायत होने पर कड़ी कार्यवाही होने के बजाय मामले में संबंधित अधिकारी वर्ग आपदा में अवसर ढूंढ लेते हैं. और कलम की जादूगरी से मामले को टरकाते रहते हैं.
ग्राम पंचायत कोरमी में 20 फरवरी 2025 को सरपंच पद हेतु निर्वाचन प्रक्रिया के तहत चुनाव संपन्न हुआ. बताया जाता है कि ग्राम कोरमी में इस बार सरपंच पद के लिए अनुसूचित जनजाति वर्ग एवं महिला सीट के लिए रिजर्व थी. जिसमें सुंदरी धुरी ने चुनाव में जीत हासिल कर लिया. चुनाव परिणाम आने के बाद दूसरे नंबर पर रही दुर्गेश्वरी मरकाम ने अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) बिलासपुर के समक्ष दिनांक 3 मार्च 2025 को लिखित आवेदन प्रस्तुत कर आरोप लगाया कि सुंदरी धुरी का जाति प्रमाण पत्र फर्जी है. इसके बाद आवेदन स्वीकार कर तलवाना आदेश पारित किया गया. वही आवेदन दिनांक से लेकर 11 माह तक पेशी चलाया गया.
उपलब्ध दस्तावेज में देखा जा सकता है कि मामले पर याचिकाकर्ता द्वारा दिनांक 3 फरवरी 2025 के बाद 11माह में निरंतर 9 पेशी अटेंड किया गया. वही दिनांक 5 अगस्त 2025 साहब को अचानक याद आया कि याचिकाकर्ता द्वारा छत्तीसगढ़ पंचायत ( निर्वाचन अर्जियां, भ्रष्टाचार, और सदस्यता के लिए निरहर्ता ) नियम 1995 के नियम 07 के तहत प्रतिभूत राशि जमा नहीं किया गया है. यह लिखकर नोट शीट चलाया गया. फिर अगले तीसरे दिन यानी कि 8 अगस्त 2025 को साहब ने आदेश पारित करते हुए याचिकाकर्ता कि आवेदक को निरस्त कर दिया .अब यह आदेश लोगो के लिए चर्चा का विषय बना हुआ है.
भारतीय जनता पार्टी के नेता, कार्यकर्ता, समर्थक भले ही सुशासन का दवा करें लेकिन प्रदेश में कार्यरत प्रशासनिक अधिकारियों की करगुजारी से धरातल पर सारे दावे खोखले साबित होते नजर आ रहे हैं. खासकर बिलासपुर राजस्व विभाग के कुछ अधिकारियों को लेकर कहा जा रहा है कि इन अधिकारियों के पास अद्भुत कला है जो की अपनी जादूगरी से अगर चाह लिया तो वह काम जो महीना में होना है उसे कुछ हि दिनों में समेट देंगे. और अगर चाह लिए की काम को रोकना है तो महीने में होने वाले काम को सालों बिताने की कला साहब एवं साहिबा रखते है.
आखरी में 2 सवाल…..
याचिकाकर्ता को प्रतिभूत राशि पटाने के लिए पिछले 11 महीने में 9 पेशी अटेंड करने के दरमियान एक बार भी क्यों नहीं कहा गया ?
एसडीएम साहब को ऐसी क्या जरूरत आन पड़ी कि प्रतिभूत राशि पटाने का समय याचिकाकर्ता को न देकर अचानक आनन फानन में आदेश पारित करना पड़ा.