एस. ई. सी. एल. दिपका विस्तार परियोजना में फर्जी दस्तावेज के सहारे नौकरी करने कि शिकायत, फर्जी लोगों की दलाली कर किस नौकरशाह ने दबा रखा है मामला ?
एस. ई. सी. एल. दिपका विस्तार परियोजना में फर्जी दस्तावेज के सहारे नौकरी करने कि शिकायत, फर्जी लोगों की दलाली कर किस नौकरशाह ने दबा रखा है मामला ?

न्यूज़ छत्तीसगढ़ टुडे (संतोष साहू)
बिलासपुर – देश के सम्मानित संस्थान एस. ई. सी. एल दिपका विस्तार परियोजना में फर्जी दस्तावेज के सहारे नौकरी करने का मामला प्रकाश में आया हैं. जिसको लेकर लिखित शिकायत किया गया. लेकिन जाँच फिलहाल ठंडे बस्ते में बताया जा रहा है. जिसको लेकर कई तरह कि चर्चाइये लोगो के बीच सुनने को मिल रही है. मामले पर जांच एवं कार्यवाही कब तक हो पाएगी यह कह पाना भी अतिशयोक्ति होगी. क्योंकि इन दिनों दिपका परियोजना में एक नौकरशाह द्वारा कोयले के साथ अपना ईमान बेचने कि चर्चा है. जो फर्जी दस्तावेज के सहारे नौकरी करने वाले लोगों का मसीहा बनकर इन दिनों उनकी दलाली कर रहा है. इस कार्य में श्रमिकों के हित का दावा वाला एक कथित संगठन के कुछ लोगो के सक्रिय होने की बात भी सामने आ रही है जो मेडिएटर कि भूमिका निभाना बताया जा रहा है.
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ प्रदेश में आदिवासियों को प्रदेश का मूल निवासी माना जाता है साथ ही उन्हें आर्थिक व शैक्षणिक दृष्टि से मजबूत करने के उद्देश्य से शासकीय संस्थानों में नौकरियां आसानी से मिल सके इसलिए उन्हें विकेंसी में आरक्षण के आधार पर नौकरी प्राप्त करने के लिए खासा छूट शासन ने प्रदान किया है।लेकिन आरक्षण का लाभ वास्तविक में आदिवासियों को कितना प्राप्त होता है यह बता पाना थोड़ा मुश्किल है. लेकिन कुछ शातिर लोग जो कि अन्य जाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग होते हुए भी फर्जी तरीके से अनुसूचित जनजाति का कूट रचित दस्तावेज बनवा कर आसानी से शासकीय नौकरियां प्राप्त कर मजे मार रहे हैं। जिसकी जानकारी विभाग के उच्च अधिकारियों को भी नहीं रहती है. लेकिन जांच अधिकारी ऐसी शिकायतों पर अनावेदक से दलाली कर मामले को दबाकर रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.
ऐसा ही कुछ मामला प्रकाश में आया है. जिसमे कि फर्जी दस्तावेज के सहारे एस. ई. सी. एल दिपका विस्तार परियोजना में एक कर्मचारी की पदस्थापना बताई जा रही है.पूरे मामले को लेकर लिखित शिकायत किया गया है. शिकायतकर्ता का आरोप है कि गेवरा क्षेत्र अंतर्गत अधिग्रहित जमीन के एवज में संतोष सिंह पिता शत्रुहन सिंह को रोजगार प्रदान किया गया है. जिसकी पदस्थापन वर्तमान में दीपका विस्तार परियोजना पर है शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि जिस भूमि अधिग्रहण के एवज में नौकरी दिया गया है वह असल में मधुराखन सिंग पिता ठाकुर सिंग ग्राम बिंझरा, जिला कोरबा छत्तीसगढ़ के हक की जमीन थी. जिसे एस. ई. सी. एल गेवरा क्षेत्र द्वारा उक्त भूमि को अर्जित किया गया था . जिसके एवज में खातेदार या उसके आश्रितों को परियोजना में नौकरी एवं अन्य सुविधाएं दिए जाने का प्रावधान है. आरोप है कि संतोष सिंह के द्वारा कूट रचित दस्तावेज बनाकर अपने आप को मदुराखन सिंह का वारिस बताया गया है.
जबकि नौकरी करने वाला संतोष सिंह (राजपूत वर्ग) से ताल्लुक रखता है वही उक्त भूमि स्वामी मदुराखन सिंग मूलतः आदिवासी वर्ग का होना बताया जा रहा है. अगर शिकायतकर्ता के आरोप मे किसी प्रकार की सत्यता होती है तो मामला बड़ा ही गंभीर है. इस मामले को देख कर एक बड़ा सवाल यह उठता है कि छत्तीसगढ़ प्रदेश को आदिवासी मुख्यमंत्री तो मिला लेकिन क्या आदिवासियों को उनका वास्तविक अधिकार मिल पाएगा. अपने आप में यहां एक बड़ा सवाल है. इस मामले पर विश्वसनीय सूत्र बताते हैं कि एस. ई सी. एल. में ऐसे दर्जनों कर्मचारी कार्यरत है जो फर्जी दस्तावेज के सहारे विभाग में लंबे समय से नौकरी कर रहे हैं. और समय-समय पर इनकी शिकायत भी किया जाता है. ऐसे मामले में विश्वसनीय सूत्रों का दावा है कि इस तरह के शिकायतों कि जांच को प्रभावित करने के लिए विभाग मे एक कथित श्रमिक हित वाला संगठन सक्रिय है. जो अधिकारियों के साथ साठ – गाठ करके मामले को दाखिले दफ्तर करने का प्रयास करते हैं.
आखरी में कुछ सवाल
दीपका परियोजना में कार्यरत कितने कर्मचारियों के खिलाफ शिकायत उपरांत जाँच लंबित है ?
दीपिका परियोजना में कौन अधिकारी शिकायत,जांच को दबा कर रखता है.?

