कलेक्टर के मौखिक आदेश की आड़ में 15 हजार का कथित खेल ! बिलासपुर से तखतपुर तक पंजीयन व्यवस्था पर सवाल” मूल खसरे से टुकड़ों में रजिस्ट्री का खेल! 15 हजार की कथित वसूली किसके इशारे पर ?

कलेक्टर के मौखिक आदेश की आड़ में 15 हजार का कथित खेल ! बिलासपुर से तखतपुर तक पंजीयन व्यवस्था पर सवाल”     मूल खसरे से टुकड़ों में रजिस्ट्री का खेल! 15 हजार की कथित वसूली किसके इशारे पर ?

कलेक्टर के मौखिक आदेश की आड़ में 15 हजार का कथित खेल ! बिलासपुर से तखतपुर तक पंजीयन व्यवस्था पर सवाल”

मूल खसरे से टुकड़ों में रजिस्ट्री का खेल! 15 हजार की कथित वसूली किसके इशारे पर ?

 

 

 

 

 

 

 

 

न्यूज़ छत्तीसगढ़ टुडे (संतोष साहू)

बिलासपुर – डायवर्सन भूमि के मूल खसरा भूमि को छोटे-छोटे टुकड़ों में विभाजित कर रजिस्ट्री कराने के नाम पर कथित तौर पर 15 हजार रुपये तक की वसूली किए जाने का मामला सामने आया है। बिलासपुर से तखतपुर तक फैले इस कथित खेल ने पंजीयन व्यवस्था की पारदर्शिता और संबंधित कार्यालयों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि बिलासपुर कलेक्टर के मौखिक आदेश का हवाला देकर जहां मूल खसरे से टुकड़ों में रजिस्ट्री पर रोक की बात कही जाती है, वहीं दूसरी ओर इसी तरह की रजिस्ट्री किए जाने के बदले मोटी रकम वसूले जाने की चर्चा है।

 

 

मौखिक आदेश की आड़ या नियमों की मनमानी व्याख्या?

 

इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि मूल खसरे से टुकड़ों में रजिस्ट्री को लेकर कोई प्रशासनिक निर्देश प्रभावी है, तो उसका लिखित आदेश क्या है और उसका पालन किस तरह कराया जा रहा है.क्या संबंधित कार्यालयों में आदेश की स्पष्ट प्रति उपलब्ध है. यदि नहीं, तो मौखिक आदेश का हवाला देकर आम लोगों को असमंजस में रखने की स्थिति क्यों बन रही है.

आरोपों के मुताबिक, बिलासपुर पंजीयन कार्यालय से लेकर तखतपुर उप पंजीयक कार्यालय तक डायवर्सन वाली भूमि मूल खसरे से छोटे भूखंडों की रजिस्ट्री कराने के नाम पर 15 हजार रुपये की कथित मांग या वसूली का मामला चर्चा में है।

 

 

मीडिया ने पड़ताल किया तब बिलासपुर जिला पंजीयन कार्यालय मे मौजूद कुछ दस्तावेज लेखकों ने स्वीकार किया कि यदि आपको डायवर्सन भूमि वाले मूल खसरे में से टुकड़ा रजिस्ट्री करना है तो 15 हजार रुपए अतिरिक्त देना होगा. क्योंकि यह रकम अंदर कार्यालय के अधिकारी तक जाती है

अब सवाल उठता है यदि यह रकम वास्तव में अवैध रूप से ली जा रही है, तो यह जांच का गंभीर विषय है कि इसकी मांग कौन अधिकारी कर रहा है, पैसा किसके पास पहुंच रहा है

 

15 हजार का कथित बाजार किसने सजाया?

 

जमीन की रजिस्ट्री कराने पहुंचने वाले लोगों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि नियमानुसार पंजीयन प्रक्रिया के अतिरिक्त यदि कोई रकम मांगी जाती है, तो उसका आधार क्या है. क्या यह किसी वैधानिक शुल्क का हिस्सा है या फिर कथित तौर पर सुविधा शुल्क के नाम पर रकम वसूलने का तरीका है.

 

बिलासपुर से तखतपुर तक एक जैसी रकम वसूली की चर्चा होने से यह भी सवाल उठ रहा है कि कहीं यह अलग-अलग स्तर पर चल रही अनियमितता तो नहीं, अथवा इसके पीछे कोई संगठित व्यवस्था काम कर रही है। हालांकि, कथित वसूली की रकम का बंटवारा किसे और कितना होता है, इसकी पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है। इसकी वास्तविकता सामने लाने के लिए निष्पक्ष जांच, संबंधित दस्तावेजों की पड़ताल किया जाना चाहिए.

 

जिला पंजीयक ने दिया कार्यवाही का भरोसा

इस संबंध में जिला पंजीयक आर.के. स्वर्णकार से चर्चा की गई। उन्होंने स्पष्ट कहा कि इस तरह का कृत्य कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ऐसे कार्य करने या वसूली में संलिप्त पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने मामले की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करने का भरोसा भी दिया।

वहीं, सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, जल्द ही एक उप पंजीयक को कारण बताओ नोटिस जारी किए जाने की संभावना है। हालांकि, नोटिस जारी होने और उसमें दर्ज आरोपों की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।

संतोष साहू मोबाइल. +919827329895

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