मुख्यमंत्री का ओएसडी बताकर बेरोजगार युवक से किया ठगी,गिरोह ने शासकीय नौकरी लगाने के नाम पर किया लाखो रुपए का गोलमाल, षड्यंत्र में अपर कलेक्टर नवीन भगत के शामिल होने का दावा, प्रार्थी ने मामले को लेकर थाने में किया शिकायत……
मुख्यमंत्री का ओएसडी बताकर बेरोजगार युवक से किया ठगी,गिरोह ने शासकीय नौकरी लगाने के नाम पर किया लाखो रुपए का गोलमाल, षड्यंत्र में अपर कलेक्टर नवीन भगत के शामिल होने का दावा, प्रार्थी ने मामले को लेकर थाने में किया शिकायत……

अभ्युदय भारत न्यूज़ (संतोष साहू )
बिलासपुर – छत्तीसगढ़ प्रदेश के वर्तमान मुख्यमंत्री का ओएसडी बताकर एक व्यक्ति ने बेरोजगार युवक से शासकीय विभाग में नौकरी लगने के नाम पर लाखों रुपए ठगी करने का मामला प्रकाश में आया है. इस षड्यंत्र में एक परिवार के पिता, पुत्र, पुत्री, एवं अपर कलेक्टर व अन्य सहयोगी के ऊपर ठगी करने का आरोप लगाया जा रहा है पूरे मामले को लेकर प्रार्थी ने लिखित शिकायत संबंधित थाना में किया है
एक व्यक्ति ने दावा किया है कि वह अपने पुत्र को शासकीय विभाग में नौकरी लगाने के नाम पर लाखों रुपए एक गिरोह को दे डाला है लेकिन अब तक उसकी नौकरी नहीं लगी है. पूरे मामले को लेकर संबंधित थाने में शिकायत किया गया है. शिकायतकर्ता अश्वनी कुमार डडसेना अमरपुरी चौक, सुंदर नगर जिला रायपुर निवासी है. उन्होंने दिनांक 27 अक्टूबर 2024 को थाना गोल बाजार जिला रायपुर मे पूरे मामले को लेकर लिखित शिकायत किया है.
उन्होंने आरोप लगाया है कि शीतल ध्रुव व उनके पुत्र मृत्युंजय ध्रुव एवं पुत्री ने नौकरी लगाने के नाम पर उसके साथ षडयंत्र करके लाखों रुपए का ठगी किया है. शिकायतकर्ता के अनुसार अनावेदक शीतल ध्रुव ने प्रार्थी से मुलाक़ात के दरमियान अपने आप को आरटीओ का रिटायर्ड कमिश्नर बताया एवं वर्तमान मुख्यमंत्री का ओएसडी होना बताया. साथ हि उन्होंने अन्य विभाग में उच्च अधिकारियों एवं बड़े-बड़े लोगों के साथ जान पहचान होने का दावा किया. इसी बीच दोनों पक्ष की मित्रता बढ़ती चली गई. शिकायतकर्ता का दावा है कि अपने भरोसे पर लेने के लिए अनावेदक ने जिला गरियाबंद के कलेक्टर कार्यालय पर स्थित सहायक आयुक्त आदिवासी विकास कार्यालय में बैठे अधिकारी से मुलाकात करवाया. जिन्होंने अपना नाम नवीन भगत बताया.
वही पुत्र मृत्युंजय एवं बड़ी पुत्री जो कि अपने आप को महासमुंद मैं शिक्षिका होना बताया और दावा किया कि नवीन भगत समर्थ व्यक्ति है और 7 लाख 50 हजार रुपए पैसा खर्च करने पर आपके पुत्र को कलेक्टर कार्यालय में परमानेंट बाबू के पद पर नौकरी लगवा देंगे. शिकायतकर्ता का यह भी दावा है कि नवीन भगत साहब ने भी कहा कि तुम रकम 7 लाख 50 हजार रुपए शीतल ध्रुव के पास दे दो 15 दिन के भीतर आपके बेटे का चयन गरियाबंद कलेक्टर के आदिवासी विकास शाखा अथवा मंत्रालय में बाबू के पद पर स्थाई नियुक्ति हो जाएगा. जिसके बाद प्रार्थी ने दिनांक 19 जून 2024 को तहसील कार्यालय रायपुर में 5 लाख रुपए शीतल ध्रुव को दे दिया एवं दिनांक 27 जून 2024 को शेष राशि 2 लाख 50 रुपए दे दिया. रकम देने के बाद निर्धारित किए गए समय 15 दिन भी जाने के बाद भी नौकरी नहीं लगने पर रकम लौटाने के लिए प्रार्थी के द्वारा अनावेदक से कहा गया. जिस पर वह टालमटोल करते रहे.
इसी बीच एक व्यक्ति ने प्रार्थी अश्वनी कुमार डडसेना से संपर्क किया और अपना नाम गजेंद्र कश्यप एवं अपर कलेक्टर गरियाबंद नवीन भगत का लाईजनर होना बताया. और दावा किया कि तुम्हारे द्वारा दिया गया रकम 2-3 दिन के भीतर वापस हो जाएगा. लेकिन समय बीत जाने के बाद भी रकम नहीं लौटाया गया. लगातार मांग करने पर शीतल ध्रुव द्वारा प्रार्थी को भारतीय स्टेट बैंक का चेक क्रमांक 7341 63 दिनांक 21 अक्टूबर 2024 को लगा लेना बोल कर चेक दिया गया. और कहां गया कि इस चेक को अभी मत लगाना खाते में पैसे नहीं है अगर चेक बाउंस हुआ तो तुम्हें पैसे वापस नहीं दिया जाएगा,वही जब प्रार्थी ने कहा कि मामले को लेकर पुलिस में शिकायत करूंगा तब अनावेदकों के द्वारा जान से मारने की धमकी दिया गया. पूरे मामले को लेकर संबंधित थाना में शिकायत दर्ज कराया गया है. अब देखने वाली बात यह होगी कि पुलिस द्वारा ऐसे संवेदनशील मामले में कितनी शीघ्रता से कार्यवाही करती है
