मातृ शिशु जिला अस्पताल में प्रसूताओं से थायराइड जांच के नाम पर अवैध वसूली का साक्ष्य प्रमाण के बाद भी कार्यवाही नहीं, सिविल सर्जन अनिल गुप्ता की भूमिका पर अब उठ रहा सवालिया निशान …….? जिला अस्पताल पर पदस्थत त्रिलोचन प्रसाद साहू शासकीय जगह में बैठकर आम जनता के लिए कर रहे काम या फिर निजी पैथोलैब संचालक का कमीशन एजेंट ?… प्रसूताओं से थायराइड जांच के नाम पर प्रतिमाह लाखों की अवैध वसूली में किसका – किसका हिस्सा, यह किस्सा जरा स्वास्थ्य मंत्री को भी बतलाइए साहब……?
मातृ शिशु जिला अस्पताल में प्रसूताओं से थायराइड जांच के नाम पर अवैध वसूली का साक्ष्य प्रमाण के बाद भी कार्यवाही नहीं, सिविल सर्जन अनिल गुप्ता की भूमिका पर अब उठ रहा सवालिया निशान …….?
जिला अस्पताल पर पदस्थत त्रिलोचन प्रसाद साहू शासकीय जगह में बैठकर आम जनता के लिए कर रहे काम या फिर निजी पैथोलैब संचालक का कमीशन एजेंट ?…
प्रसूताओं से थायराइड जांच के नाम पर प्रतिमाह लाखों की अवैध वसूली में किसका – किसका हिस्सा, यह किस्सा जरा स्वास्थ्य मंत्री को भी बतलाइए साहब……?

बिलासपुर – छत्तीसगढ़ प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के स्वास्थ्य विभाग जिला बिलासपुर में इन दिनों आम जनता विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारियों के व्यवहार, भ्रष्टाचार से परेशान है. साक्ष्य प्रमाण के साथ शिकायत करने के बाद भी कार्यवाही न होना विभाग के वरिष्ठ की मिली भगत को इंगित करता है. स्वास्थ्य विभाग के प्रशासन की छवि को धूमिल करने का काम इन दिनों जिला बिलासपुर के मातृ शिशु जिला अस्पताल बिलासपुर में कार्य करने वाले कुछ डॉक्टर एवं छोटे कर्मचारियों के द्वारा किया जा रहा है. वही शिकायत साक्ष्य प्रमाण के साथ पर लिखित में करने के बाद भी डॉ एवं कर्मचारी के खिलाफ कोई ठोस कार्यवाही सिविल सर्जन अनिल गुप्ता के द्वारा नहीं किया गया. वही मामले को जांच के नाम पर ठंडा बस्ते में डाल कर डॉक्टर एवं कर्मचारी को संरक्षण प्रदान किया जा रहा है.
सिविल सर्जन अनिल गुप्ता के प्रभार क्षेत्र मातृ शिशु जिला अस्पताल में मरीजो के साथ दुर्व्यवहार एवं इलाज में लापरवाही होना इन दिनों आम बात हो चली है. वहीं दूसरी ओर विभाग पर पदस्थ ब्लड सैंपल टेस्ट करने वाले कर्मचारी त्रिलोचन प्रसाद साहू (MLT – मेडिकल लैब टेक्नीशियन) की बात किया जाए तो वह शासन से तनख्वाह लेकर आम जनता के लिए काम कर करते हैं या फिर जिला अस्पताल बिलासपुर में बैठकर निजी पैथोलैब संचालक का कमीशन एजेंट बनकर काम कर रहे हैं यह समझ पाना थोडा कठिन हैं. लेकिन कुछ साक्ष्य और प्रमाण इस ओर इंगित करते हैं कि सिविल सर्जन अनिल गुप्ता के प्रभार क्षेत्र मातृ शिशु, जिला अस्पताल में प्रसूताओं से थायराइड जांच के नाम पर प्रतिमाह लाखों रूपए की अवैध वसूली कि जा रही हैं. इस मामले पर शिकायत के बाद भी अब तक कार्यवाही न होना सिविल सर्जन अनिल गुप्ता कि भूमिका को संदिग्ध बना रहा है.
जिला अस्पताल बिलासपुर में पदस्थ त्रिलोचन प्रसाद साहू (MLT – मेडिकल लैब टेक्नीशियन) के खिलाफ लिखित शिकायत किया गया है. शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि वह अपनी धर्मपत्नी का ईलाज कराने विगत दिनो जिला अस्पताल दिनाँक 28. 07.2025 को गया था. जहा पर पर्ची कटाने के बाद डॉक्टर को दिखाया गया. डॉक्टर के द्वारा ब्लड टेस्ट, थायराइड टेस्ट एवं अन्य टेस्ट कराने के लिए लिखा गया. प्रार्थी अपनी पत्नी का जिला अस्पताल मे सभी टेस्ट करना कहा. तब मौके पर मौजूद कर्मचारी त्रिलोचन प्रसाद साहू ने बताया गया कि हमारे यहा पर थायराइड टेस्ट नही होता है। अगर थायराइड टेस्ट कराना है तो आपको 300 रूपए देना होगा.

जिसके बाद ऑनलाईन माध्यम (फोन पे) से दिनाँक 28.07.2025 समय 10:31 Am को 300 रूपए त्रिलोचन प्रसाद साहू (MLT) के निजी अकाउंट पर पेंमेट भुगतान किया गया। उक्त थायराइड जाँच टेस्ट रिर्पोट लेने के लिए दूसरे दिन बुलाया गया. बताए गए समय पर पहुंच कर जाँच रिर्पोट प्राप्त कर किया. उक्त जांच रिपोर्ट निजी संस्था manipal trutest द्वारा जारी किया जाना बताया जा रहा हैं..
मातृ शिशु जिला अस्पताल में प्रतिदिन 50 – 70 महिलाओं से थायराइड टेस्ट के नाम पर 300 रुपए कि प्रत्येक से अवैध वसूली..!
मातृ शिशु जिला अस्पताल बिलासपुर में प्रतिदिन 50 – 70 महिलाओं को थायराइड टेस्ट कराने लिखा जाता हैं. जिसके बाद जिला अस्पताल में बैठे कर्मचारियों के द्वारा ब्लड सैंपल लेते समय बतलाया जाता है कि थायराइड हमारे यहां नहीं होता है. जिसके बाद असल खेल शुरू होता है. काउंटर पर बैठा कर्मचारी प्रत्येक व्यक्ति से तारे टेस्ट के नाम पर 300 रुपए की अवैध वसूली करता हैं. सामान्य तौर पर हिसाब लगाया जाए कि अगर प्रतिदिन 50 महिलाओं से 300 के हिसाब से 15 हजार, महीने का आकलन किया जाए तो 4 लाख 50 हजार तक की अवैध वसूली थायराइड जांच के नाम पर की जा रही है. इस पूरे मामले पर मजेदार बात यह है कि साक्ष्य प्रमाण के साथ लिखित शिकायत करने के बाद भी सिविल सर्जन अनिल गुप्ता के द्वारा कोई ठोस कार्यवाही अब तक नहीं किया गया है. इस पूरा मामले को लेकर समाचार के अंत पर हम तो बस इतना कहेंगे कि प्रसूताओं से थायराइड जांच के नाम पर प्रतिमाह लाखों की अवैध वसूली में किसका – किसका हिस्सा, यह किस्सा जरा स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल को भी बतलाइए साहब…!

