ग्राम पंचायत परसदा के पूर्व सरपंच-सचिव ने किया जमकर भ्रष्टाचार, जांच अधिकारियों ने 2 साल बिताने के बाद भी कार्यवाही नहीं किया पूरा,
ग्राम पंचायत परसदा के पूर्व सरपंच-सचिव ने किया जमकर भ्रष्टाचार, जांच टीम ने 2 साल बिताने के बाद भी कार्यवाही नहीं किया पूरा,

न्यूज़ छत्तीसगढ़ टुडे (संतोष साहू )
बिलासपुर – जनपद पंचायत कोटा क्षेत्र के अधिकांश ग्राम पंचायत में जमकर भ्रष्टाचार किया गया है. किसी ग्राम पंचायत में उपकरण खरीदी के नाम पर घोटाला किया गया. तो कुछ ग्राम पंचायत पर कार्य किए बिना राशि आहरण किया गया हैं. वही एक महिला सरपंच ने अपने पति के फर्म (संस्था) को भुगतान किया. इस तरह कि शिकायत जिला पंचायत बिलासपुर में किया गया था.इस मामले कि जाँच हेतु टीम गठन किया गया. जांच की प्रक्रिया भी प्रारंभ हुई लेकिन 2 साल बीत जाने के बाद भी जांच कार्यवाही पूरा नहीं हो पाई है. जिसके कारण विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों कि जाँच कार्य शैली एवं उनकी भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं.

गौरतलब है जनपद पंचायत कोटा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत परसदा के तत्कालीन महिला सरपंच सोनिया जगत के खिलाफ पंचगण के द्वारा दिनाँक 15 जुलाई 2022 को मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत बिलासपुर को लिखित शिकायत किया गया था. उनके ऊपर आरोप लगाया गया कि उन्होंने सरपंच पद पर रहने के दरमियान अपने पति नरेंद्र जगत के फर्म को लाखों रुपए का भुगतान किया है. वहीं कुछ ऐसे कार्य है जो कागजों में होना बताया गया लेकिन भौतिक स्थल पर नहीं किया गया ! सूचना का अधिकार से प्राप्त दस्तावेज के अनुसार उक्त शिकायत के बाद उप संचालक पंचायत बिलासपुर ने दिनाँक 04-08-2022 को तीन सदस्य जांच दल का गठन किया था. जाँच समिति में अशोक धिरही ( प्रभारी जिला अंकेक्षण उपसंचालक पंचायत बिलासपुर), दीपक शर्मा सहायक. आं. लेखा. परी एवं करा. अधिकारी, दीपक घोष सहायक. आं. लेखा. परी एवं करा. अधिकारी सम्मिलित है ! नियमानुसार तत्कालीन सरपंच, सचिव, पंचगण को जांच एवं कार्यवाही से संबंधित सूचना पत्र भेजा गया. संबंधित अधिकारियों ने शिकायतकर्ताओं एवं तत्कालीन सरपंच सचिव के समक्ष सभी दस्तावेजों का अवलोकन किया गया.

इसके बाद जांच अधिकारियों ने रिपोर्ट तैयार कर बताया कि सरपंच पति के फर्म को विभिन्न कार्यों की राशि 421840 रुपए भुगतान कर छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम 1993 की धारा 40 (ग) का उल्लंघन किया गया है. विभिन्न कार्यों पर दर्ज की राशि व्यय दर्ज कर अनियमितता की गई है. पंचो द्वारा किए गए शिकायत प्रमाणित होने के बाद भी कार्यवाही अब तक पूरा नहीं किया गया. अगर निष्पक्षता के साथ जांच किया जाए तो ग्राम पंचायतो में हुए भ्रष्टाचार की जांच करने वाले अधिकारियों द्वारा अधिकांश जांच एवं कार्यवाही पूरा नहीं किया गया हैं ! सरल शब्दों में कहा जाए तो जांच को पेंडिंग रखना इन इन जाँचकर्ता अधिकारियों की फितरत बन चुकी है.
जिला बिलासपुर के लिए दुर्भाग्य की बात है कि कार्यालय उपसंचालक पंचायत विभाग में कुछ ऐसे अधिकारी पिछले 30 सालों से पदस्थ हैं जिनके संरक्षण पर जिला के अधिकांश ग्राम पंचायतो में जमकर भ्रष्टाचार किया गया है. क्योंकि ग्राम पंचायत में सरपंच – सचिव द्वारा भ्रष्टाचार करने के बाद उनकी शिकायत जिला पंचायत, कार्यालय उप संचालक पंचायत, जिला कलेक्टर के समक्ष किया जाता है. वही अधिकांश मामलों की जांच कार्यालय उपसंचालक पंचायत जिला बिलासपुर में पदस्थ अधिकारियों द्वारा किया जाता हैं ! अगर गौर किया जाए तो अधिकांश ग्राम पंचायत में आर्थिक अनियमित की जांच हेतु कार्यालय उपसंचालक पंचायत बिलासपुर में पिछले 30 सालों से पदस्थ एक वरिष्ठ अधिकारी के नेतृत्व में जांच दल का गठन किया जाता है. जिसके बाद असल खेल यही से शुरू होता है. क्योंकि इस साहब को पता है कि कौन सी शिकायत कि जाँच को कैसे ठंडे बस्ते डाला जाता है. वही चाहते सरपंच सचिव को बचाने जांच को कैसे प्रभावित किया जाए इस तरह कि कार्य दक्षता में साहब निपुण हैं. किसी भी ग्राम पंचायत सरपंच – सचिव के खिलाफ शिकायत होने के बाद सेटिंग के इस खेल में सचिव संघ के कुछ पदाधिकारी की महत्वपूर्ण भूमिका होती है. जो जांच अधिकारी एवं भ्रष्टाचार में लिप्त सरपंच- सचिव के बीच मेडिएटर का काम करते हैं.
वही गुलाबी मिठाई का भार तय करता हैं कि किस मामले को कितना ठंडा बस्ते में डाला जाएगा. वही यह भी चर्चा है कि ऐसी अद्भुत कला को प्रदर्शन करने के बाद मामले में फंसा सरपंच – सचिव दुधारू गाय की तरह दुहाया जाता है. भ्रष्टाचार के दूध से बने खीर को साहब के निर्देशानुसार एक निश्चित मापदंड पर बाटकर भोग लगाया जाता है. भ्रष्टाचार की भोग, मलाई खाने वाले जांच अधिकारीयो द्वारा मामले को योजनाबद्ध तरीके से सालो घसीटा जाता है. निश्चित साहब के पास विशेष ख्याति हैं. जो भ्रष्टाचार में लिप्त सरपंच- सचिव को बचाने नोटिस- नोटिस का खेल खेलकर अधिकांश समय व्यतीत करते हैं. और समय-समय पर अद्भुत ज्ञान देते हुए नोटिस का जवाब स्वयं तैयार करवाते हैं. लेकिन उनका पैत्रा कही पर असफल भी होता है जैसे की विषय में देखा जा सकता है


नोटिस के बाद एक जवाब तैयार किया गया है जिसमें उल्लेख किया गया कि एक कार्य (पचरी मरम्मत ) जो वर्ष 2020-21 में राशि 22640 रुपए से किया गया. वही कार्य को वर्ष 2024 25 में राशि 23140 खर्च करके करना बताया जा रहा है. प्राप्त दस्तावेज के अनुसार अवलोकन किया गया. तो फोटो में साफ देखा जा सकता है कि वर्ष 2020-21 एवं 2024- 25 में एक ही कार्य को दो बार करना बताया गया है दोनों जगह में लुंगी पहन के खड़ा व्यक्ति एक ही है. 2021 की फोटो को क्रॉप करके 2025 में काम करना बताया गया है. इस तरह से कई जगह गफलत बाजी सरपंच- सचिव कि मिली भगत से किया गया ! ग्राम पंचायत परसदा में किए गए शिकायत का जांच प्रमाण मिलने के बाद भी अब तक ठोस कार्यवाही नहीं किया गया हैं. जिसके कारण जांचकर्ता अधिकारियों कि भूमिका पर सवालिया निशान उठाए जा रहे हैं. समाचार के अगले अंक पर एक ग्राम पंचायत सचिव द्वारा उपकरण खरीदी में किए गए जमकर भ्रष्टाचार की पोल प्रमाण के साथ उजागर किया जाएगा.

