वन  विभाग का गबन पुराण, “कागजों मे दिखाया विकास” धरातल पर अकंठ  भ्रष्टाचार , मामले मे जांच अधिकारी जाँच के नाम पर कर रहे बड़ा खेला ? प्रधान मुख्य वन संरक्षक के आदेश को  जाँच अधिकारी दिखा रहे धत्ता, 14 दिन में जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने कहा, 85 दिन में नहीं कर पाए जाँच पूरी ?  साहब अब हम जान चुके है, वन विभाग मे कौन व्यक्ति गंगाधरी हि शक्तिमान है, शायद साहब को नहीं पता हम बस्तर बंधु (अख़बार ) के निडर सिपाही रह चुके है 

वन  विभाग का गबन पुराण, “कागजों मे दिखाया विकास” धरातल पर अकंठ  भ्रष्टाचार , मामले मे जांच अधिकारी जाँच के नाम पर कर रहे बड़ा खेला ?     प्रधान मुख्य वन संरक्षक के आदेश को  जाँच अधिकारी दिखा रहे धत्ता, 14 दिन में जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने कहा, 85 दिन में नहीं कर पाए जाँच पूरी ?      साहब अब हम जान चुके है, वन विभाग मे कौन व्यक्ति गंगाधरी हि शक्तिमान है, शायद साहब को नहीं पता हम बस्तर बंधु (अख़बार ) के निडर सिपाही रह चुके है 

वन  विभाग का गबन पुराण, “कागजों मे दिखाया विकास” धरातल पर अकंठ  भ्रष्टाचार , मामले मे जांच अधिकारी जाँच के नाम पर कर रहे बड़ा खेला ?

 

प्रधान मुख्य वन संरक्षक के आदेश को  जाँच अधिकारी दिखा रहे धत्ता, 14 दिन में जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने कहा, 85 दिन में नहीं कर पाए जाँच पूरी ?

 

साहब अब हम जान चुके है, वन विभाग मे कौन व्यक्ति गंगाधरी हि शक्तिमान है, शायद साहब को नहीं पता हम बस्तर बंधु (अख़बार ) के निडर सिपाही रह चुके है

 

 

 

 

 

न्यूज़ छत्तीसगढ़ टुडे (संतोष साहू)

बिलासपुर – प्रदेश में वन विभाग को हरा हंडा के नाम से भी जाना जाता है. इस हंडा कि देखरेख एवं सुरक्षा का जिम्मा वन विभाग में पदस्थ सिपाही से लेकर साहब तक की होती है. लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि कुछ जगह पर इस हरा हंडा  (वन विभाग) का रक्षक ही भक्षक बन जाते हैं. और शिकायत उपरांत जांच अधिकारी द्वारा जांच के नाम पर स्वत हित के लिए दूसरे दरवाजे से खेला करते  देखा जाता है. एक तरफ शिकायतकर्ता को  सांत्वना देते हुए ईमानदारी का राग अलापकार निष्पक्षता के साथ जांच करने का हवाला देते हैं. वहीं दूसरी ओर अपने चहेते के साथ मिलकर आपदा में अवसर ढूंढ लेते है.  कुछ इसी तरह का वाक्या  जिला बिलासपुर में देखने को मिल रहा है.

 

बिलासपुर वन मंडल के अंतर्गत आने वाले एक वन परिक्षेत्र मे विभिन्न कार्यों के नाम जमकर भ्रष्टाचार किया गया है. सूचना का अधिकार से प्राप्त दस्तावेज अनुसार वित्तीय वर्ष  2024 –  25 में पर्यावरण वानिकी योजना अंतर्गत  ईको – पर्यटन से संबंधित विकास कार्यों को करने हेतु बजट राशि 1 करोड़ 46 लाख रूपए  आवंटित किया गया था जिसमें से भवन मरम्मत मे क्रय सामग्री,  थिएटर निर्माण, डिजिटल साइनेज, आगंतुकों के लिए पीने हेतु वाटर कूलर, ग्लो साइन बोर्ड, इंटरएक्टिव टच स्क्रीन, शैक्षिक प्रदर्शन सेटअप, एलसीडी में खर्च हेतु हेतु  बजट का आवंटन किया गया था. प्राप्त दस्तावेज के अनुसार कार्य संपादन हेतु प्रशासकीय स्वीकृति, तकनीकी स्वीकृति विभाग से  लिया गया है. जिसमें कि तकनीकी स्वीकृति में साफ उल्लेख किया गया कि प्राक्कलन पर दर्शाये गए प्रावधानों एवं निर्धारित मापदंडों के अनुसार कार्य संपादित किए जाने हेतु  तकनीकी स्वीकृति प्रदान की जाती है लेकिन स्वीकृत कार्य में से कराए गए कोई भी कार्य  गुणवत्ता वर्ग प्राक्कलन अनुसार नहीं किया गया.  विभाग के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (विकास /योजना) के समक्ष पूरे मामले को लेकर लिखित शिकायत किया गया. उन्होंने  नवंबर 2025 को आदेश जारी कर कहा कि जांच रिपोर्ट 14 दिन में प्रस्तुत किया जाए लेकिन 85 दिन बीत चुके हैं  मामले पर जांच पूरा नहीं हो पाई है..

 

 

साहब जाँच के नाम पर कर रहे बड़ा खेला ?

 

छत्तीसगढ़ प्रदेश वन विभाग के प्रधान मुख्य संरक्षक  (विकास / योजना) के आदेश पर मामले की जांच जिला बिलासपुर में किया जा रहा है. बताया जाता है कि शिकायत पत्र के साथ साक्ष्य बतौर सूचना का अधिकार से प्राप्त दस्तावेज संलग्न किया गया है. उक्त शिकायत के संदर्भ में शिकायतकर्ता द्वारा जांच अधिकारी से पूछे जाने पर अपनी लगातार व्यवस्था बताते हुए निष्पक्ष जांच करने की बात कह कर शिकायतकर्ता को आश्वासन देते रहे ! फिर बुधवार को अचानक साहब के सुर बदल गए.

 

ऐसा कुछ वाकया शिकायतकर्ता को देखने मिला कि कान खड़े हो गए. दरअसल मामले की निष्पक्षता के साथ जांच करने का दम्भ भरने वाले साहब अचानक से कहने लगे कि आपके द्वारा किए गए शिकायत के संदर्भ में जांच हेतु मुझे पत्र प्राप्त नहीं हुआ है  बल्कि इस संदर्भ में कोई दूसरा शिकायतकर्ता है. बस इतना ही शब्द बोले थे कि कुछ देर पश्चात साहब का चाहने वाला एक शख्स अचानक से कार्यालय पर आ धमका जिसे देखने के बाद शिकायतकर्ता को सारा माजरा आसानी से समझ मे आ गया. साहब को भी इस बात का आभास हो गया कि शिकायतकर्ता को संदेह हो चुका है इसके बाद  साहब के चेहरे से रंग उड़ गया. मानो की साहब के तो तोते उड़ गए…….

 

 

साहब अब हम जान चुके है, वन विभाग मे कौन व्यक्ति गंगाधरी हि शक्तिमान है, शायद साहब को नहीं पता हम बस्तर बंधु (अख़बार ) के निडर सिपाही रह चुके है 

 

सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार शिकायत पत्र पर संलग्न दस्तावेज को साहब ने अपने चहेते  व्यक्ति को पीछे दरवाजे से दे दिया और अब नए स्तर से शिकायत करवा कर मामले मे मलाई मिठाई मिल बाटकर खाने का खेल साहब द्वारा किया जा रहा है. लेकिन अब उनका यह प्रोग्राम एक्सपोज हो चुका है. शायद साहब को नहीं पता हम बस्तर बंधु (अखबार) के निडर सिपाही रह चुके हैं !

खैर जो भी लेकिन साहब को प्रमोशन कि अग्रिम बधाई. अब तो आप कुछ दिनों बाद डी.एफ.ओ साहब कहलाएंगे. किसी जिला की कमान संभालकर  विभाग के माध्यम से विकास का कार्य करेंगे. आपके द्वारा भविष्य मे कराए जाने वाले विकास कार्यों कि तारीफ करने के लिए हम सदैव निष्पक्षता के साथ तैयार रहेंगे.

 

विधानसभा सत्र में वन विभाग के इस भ्रष्टाचार पर सवाल उठाने की तैयारी……

 

जिला बिलासपुर में वित्तीय वर्ष 2024 – 25 मे प्राप्त आवंटन से किए गए भ्रष्टाचार अब जांच के नाम पर सौदेबाजी का एक  बड़ा खेल मे तब्दील होते नजर आ रहा है ऐसे में चर्चा है कि 1 करोड़ 46 लाख रुपए के बजट मे कराए गए कार्य मे किए गए अकंठ भ्रष्टाचार का मामला अब माह फरवरी 2026 में होने वाले विधानसभा सत्र में उठाने कि तैयारी की जा रही है.

संतोष साहू मोबाइल. +919827329895

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