ग्राम पंचायत चोरभट्टी सरपंच ने 10 हजार रूपए में बेच दिया तालाब से मिट्टी मुरुम ?
न्यूज़ छत्तीसगढ़ टुडे (संतोष साहू )
बिलासपुर – ग्राम पंचायत चोर भट्टी सरपंच शिवदयाल यादव उर्फ मनबोध यादव द्वारा गांव के एक तालाब से मिट्टी मुरूम का सौदा कर बेचने कि चर्चा इन दिनों कोहतुल का विषय बना हुआ है. सरपंच के इस कारनामें से एक ओर शासन को राजस्व की हानि हो रही है.वही दूसरी ओर पंचायती राज अधिनियम का उल्लंघन किया जा रहा है. मामले पर “मीडिया” वस्तु स्थिति जानने खनन स्पॉट एवं सरपंच का पक्ष समझने उनके निवास पहुंची. तब सरपंच का कहना था कि हमारे ग्राम पंचायत चोरभट्टी के चकराकुडा, में स्थित बंधिया तालाब से इन दिनों मिट्टी निकाली जा रही है. इस कार्य को करने के लिए पंचायत प्रस्ताव पारित किया गया है.
सरपंच श्री शिवदयाल यादव का यह भी कहना है कि यह कार्य गहरीकरण के नाम से किया जा रहा है. जब मीडिया ने सवाल किया कि गहरीकरण के दौरान निकाली गई मिट्टी कहां जा रही है. तब उन्होंने जवाब दिया कि रेलवे साइड में जा रहा है. यहां पर सवाल उठता है कि अगर पंचायत द्वारा प्रस्ताव किया गया तो पंचायत के भीतर उक्त मिट्टी का उपयोग विकास कार्य मे किया जाना रहा था लेकिन ऐसा नहीं किया. ग्राम पंचायत को इस कार्य के बदले राजस्व प्राप्ति के संदर्भ में सवाल पूछा गया तब सरपंच का कहना था कि मिट्टी निकालने वाले ठेकेदार के द्वारा प्रति हाईवे 50 रुपए दिया जा रहा है. वही एडवांस के रूप में 10 हजार रुपए जमा किया है. उक्त राशि का उल्लेख पंचायत प्रस्ताव में किए जाने के संबंध में पूछा गया तब उनका कहना था कि इस तरह कि राशि का उल्लेख प्रस्ताव में नहीं किया जाता है. मीडिया द्वारा पूछा गया कि ठेकेदार से प्राप्त 10 हजार रुपए का रसीद पंचायत द्वारा काट कर उक्त राशि को पंचायत खाते में जमा किया गया है क्या. तब सरपंच श्री शिव दयाल यादव का कहना था कि यह राशि को नहीं जमा किया गया है. इस मामले मे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि जो सरपंच 10 हजार रुपय प्राप्त होना स्वयं कबूल रहा है वह न जाने कितना पैसा पंचायत प्रस्ताव की आड़ में प्राप्त किया होगा.
बंधिया तालाब से किए जा उत्खनन को मीडिया ने करीब से देखा तो मिट्टी के साथ मुरूम भी निकाला जा रहा है. ऐसे में सवाल उठता है कि एक जनप्रतिनिधि के द्वारा गांव के तालाब से मिट्टी को बेचकर 10 हजार रुपए को अपने निजी कार्य मे उपयोग किया जा रहा है. इस तरह के गंभीर मामलों पर विभाग द्वारा कब तक जांच किया जाएगा.