विश्व पर्यावरण दिवस पर संगोष्ठी – शिक्षाविदों को मिला ‘वसुंधरा गौरव सम्मान’

विश्व पर्यावरण दिवस पर संगोष्ठी – शिक्षाविदों को मिला ‘वसुंधरा गौरव सम्मान’

विश्व पर्यावरण दिवस पर संगोष्ठी – शिक्षाविदों को मिला ‘वसुंधरा गौरव सम्मान’

 

 

 

बिलासपुर – विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर परंपरागत ज्ञान एवं वनौषधि विकास फाउंडेशन, छत्तीसगढ़ द्वारा संगोष्ठी एवं एकेडेमिशियन सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण, भारतीय ज्ञान परंपरा, वनौषधीय विरासत तथा सतत विकास जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर सार्थक विमर्श हुआ।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं फाउंडेशन के निदेशक डॉ. निर्मल कुमार अवस्थी ने कहा कि वर्तमान समय में पर्यावरण संरक्षण और औषधीय पौधों का महत्व निरंतर बढ़ रहा है। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा में वर्णित वट, पीपल, गूलर सहित विभिन्न औषधीय वृक्षों और वनस्पतियों की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए प्रकृति को मानव जीवन का आधार बताया।

विशिष्ट वक्ता डॉ. भूपेंद्र धर दीवान ने प्रकृति और मानव अस्तित्व के अंतर्संबंधों पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्ण जीवन ही स्थायी सुख, स्वास्थ्य और सामाजिक संतुलन का मार्ग प्रशस्त करता है।

वक्ता रोहित भांगे ने विद्यालयों में व्यापक वृक्षारोपण अभियान चलाने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि हरित एवं पर्यावरण-अनुकूल विद्यालय बच्चों में प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और उत्तरदायित्व विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

वक्ता विक्रम धर दीवान ने पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने के लिए जन-जागरूकता और सामुदायिक सहभागिता को आवश्यक बताते हुए समाज के सभी वर्गों से सक्रिय योगदान का आह्वान किया।

संगोष्ठी में शिक्षाविदों, शोधार्थियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, पर्यावरण विशेषज्ञों एवं विद्यार्थियों ने सहभागिता करते हुए भारतीय ज्ञान परंपरा, वनौषधीय संपदा के संरक्षण, शिक्षा में नवाचार तथा सतत विकास के विविध आयामों पर विचार-विमर्श किया।

कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण “वसुंधरा गौरव सम्मान” रहा, जिसके अंतर्गत शिक्षा, अनुसंधान, पर्यावरण जागरूकता एवं सामाजिक सरोकारों के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले शिक्षकों, शोधकर्ताओं एवं अकादमिक विशेषज्ञों को सम्मानित किया गया।

सम्मान प्राप्त करने वालों में श्रीमती प्रीति मिश्रा, विक्रम धर दीवान, सुरेश कुमार बैस, भूपेंद्र सामनानी, अनिरुद्ध नगरकर, नवीन कुमार चौधरी, आशुतोष शुक्ला, अनिल कुमार बघेल, अजीत कुमार सिंह, रोहित भांगे, कुलेश्वर प्रसाद साहू तथा डॉ. भूपेंद्र धर दीवान शामिल रहे।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. भूपेंद्र धर दीवान ने किया तथा कुलेश्वर प्रसाद साहू ने आभार प्रदर्शन किया।

 

समापन अवसर पर फाउंडेशन के पदाधिकारियों ने कहा कि भारत की समृद्ध परंपरागत ज्ञान-संपदा एवं वनौषधीय विरासत को आधुनिक शिक्षा और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ जोड़ना समय की आवश्यकता है। उन्होंने युवाओं से अनुसंधान, नवाचार और समाजोपयोगी गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया।

संगोष्ठी का समापन शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण और परंपरागत ज्ञान के संवर्धन हेतु सामूहिक प्रतिबद्धता के साथ हुआ। वक्ताओं ने प्रकृति-सम्मत जीवनशैली और सतत विकास को भविष्य की आवश्यकता बताते हुए समाज के सभी वर्गों से सक्रिय सहभागिता का आह्वान किया।

 

संतोष साहू मोबाइल. +919827329895

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *