कबाड़ियों पर पुलिस का शिकंजा, बड़े खिलाड़ियों पर कब पड़ेगा हाथ?  नामचीन कबाड़ियों को किसका संरक्षण? छोटे कबाड़ियों पर कार्यवाही…..

कबाड़ियों पर पुलिस का शिकंजा, बड़े खिलाड़ियों पर कब पड़ेगा हाथ?   नामचीन कबाड़ियों को किसका संरक्षण? छोटे कबाड़ियों पर कार्यवाही…..

कबाड़ियों पर पुलिस का शिकंजा, बड़े खिलाड़ियों पर कब पड़ेगा हाथ?

नामचीन कबाड़ियों को किसका संरक्षण? छोटे कबाड़ियों पर कार्यवाही…..

 

 

 

 

बिलासपुर। कबाड़ कारोबार की आड़ में चोरी के माल की कथित खरीद-फरोख्त के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई से छोटे-बड़े कबाड़ियों में हड़कंप जरूर है, लेकिन शहर के उन नामचीन कबाड़ियों पर कार्रवाई कब होगी, जिनके कारोबार को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं.

सिरगिट्टी, सकरी, सरकंडा, सिटी कोतवाली, तारबाहर, तोरवा और सिविल लाइन क्षेत्र में कबाड़ कारोबार के फलने-फूलने की चर्चा है। सूत्रों का दावा है कि कुछ बड़े कबाड़ी पुलिसिया कार्रवाई से बचने के लिए कथित तौर पर दूसरों के नाम पर कारोबार संचालित कर रहे हैं। यदि यह सच है तो कागज पर मालिक कोई और और कारोबार का नियंत्रण किसी और के हाथ में—इस खेल की जांच कौन करेगा?

सिरगिट्टी थाना परिसर में हुई आगजनी के बाद हजारों वाहनों के जले कलपुर्जों और ढांचों के गायब होने को लेकर उठे सवालों का रहस्य भी अब तक पूरी तरह साफ नहीं हुआ है। इसी तरह हाईवे में लगी लोहे की रेलिंग और जालियों की कथित चोरी को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं। इतने बड़े लोहे के खेल में माल गया तो गया कहां?

दिलचस्प बात यह है कि कुछ वर्ष पहले ठेला और छोटी-मोटी दलाली से कारोबार शुरू करने वाले कुछ कबाड़ी आज करोड़ों की संपत्ति के मालिक बताए जाते हैं।

 

वही कई मामलों में नाबालिगों के चोरी की वारदातों में शामिल होने की बातें सामने आती रही हैं। ऐसे में कबाड़ की दुकानों पर सिर्फ छापा नहीं, बल्कि खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड, माल के स्रोत, स्टॉक और कारोबार से जुड़े वास्तविक संचालकों की जांच भी जरूरी है।

घनी आबादी में संचालित कबाड़ दुकानों से दिनभर लोहे की कटाई-छंटाई और ठोकने-पीटने की तेज आवाज से स्थानीय लोग परेशान होने की शिकायत करते हैं। खपरगंज की दो बड़ी कबाड़ दुकानों के घटना के बाद बंद होने और फिर दोबारा सक्रिय होने की चर्चा ने भी सवाल खड़े किए हैं।

कबाड़ के कारोबार का कथित मुनाफे वाला गणित भी जांच की मांग करता है। बाजार में करीब 80 रुपये किलो बिकने वाला लोहे का पाइप चोरी के बाद 15-20 रुपये किलो में खपने की चर्चा है। अगर चोरी का माल इतना सस्ता बिकता है, तो असली फायदा किसकी जेब में जाता है?

पुलिस कार्रवाई का स्वागत है, लेकिन कार्रवाई तभी पूरी मानी जाएगी जब छोटे कबाड़ियों के साथ बड़े और प्रभावशाली कबाड़ कारोबारियों की भी निष्पक्ष जांच हो।

बड़ा सवाल—

छोटे कबाड़ियों पर शिकंजा कस गया, अब बड़े खिलाड़ियों की बारी कब?

नामचीन कबाड़ियों के कारोबार की आर्थिक जांच कब होगी? और अगर सब कुछ वैध है, तो जांच से डर कैसा?

संतोष साहू मोबाइल. +919827329895

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *