पर्यावरण विभाग प्रतिबंधित पटाखों के कथित भंडारण पर बेखबर या फिर मौन समर्थन के साथ सेटिंग का खेल ! क्षेत्रीय पर्यावरण अधिकारी रश्मि श्रीवास्तव को आखिर मीडिया से क्यों परहेज !
पर्यावरण विभाग प्रतिबंधित पटाखों के कथित भंडारण पर बेखबर या फिर मौन समर्थन के साथ सेटिंग का खेल !
क्षेत्रीय पर्यावरण अधिकारी रश्मि श्रीवास्तव को आखिर मीडिया से क्यों परहेज !
न्यूज़ छत्तीसगढ़ टुडे (संतोष साहू)
बिलासपुर – त्योहारों का मौसम शुरू होते ही पटाखा बाजार में गतिविधियां तेज हो गई हैं। नवरात्रि के बाद दशहरा और दीपावली जैसे बड़े पर्व सामने हैं, लेकिन इसी बीच शहर में प्रतिबंधित पटाखों के कथित भंडारण और आपूर्ति को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि जिला में बड़ी मात्रा में प्रतिबंधित पटाखों का भंडारण आवासीय क्षेत्रों में स्थित स्थायी लाइसेंसधारी दुकानदारों के पास किया गया है और वहां से छोटे व्यापारियों तक इनके द्वारा आपूर्ति की जा रही है। इस बात की जानकारी होने के बाद क्षेत्रीय पर्यावरण विभाग जिम्मेदार अधिकारी कुंभकरण नींद पर सोए हुए हैं
क्षेत्रीय पर्यावरण अधिकारी रश्मि श्रीवास्तव को आखिर मीडिया से क्यों परहेज !
पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण की जिम्मेदारी निभाने वाले बिलासपुर क्षेत्रीय पर्यावरण कार्यालय की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। प्रतिबंधित पटाखों के कथित भंडारण और बिक्री के संबंध में क्षेत्रीय पर्यावरण अधिकारी रश्मि श्रीवास्तव से चर्चा करने के लिए कई बार संपर्क करने का प्रयास किया गया । लेकिन कार्यालय में मुलाकात नहीं हो सकी. मीडिया द्वारा उनको लगातार फोन करने पर भी उन्होंने फोन नहीं उठाया. एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के पद पर रहने के बाद भी उनके द्वारा फोन ना उठाना उनकी भूमिका को संदिग्ध बनता है. शायद इसीलिए उन्होंने मीडिया से दूरी बनाना उचित समझा है
बिलासपुर क्षेत्रीय पर्यावरण कार्यालय मे जिम्मेदार अधिकारी रश्मि श्रीवास्तव से मुलाकात न होने पर अधीनस्थ अधिकारियों से प्रतिबंधित पटाखों के संबंध में चर्चा किए जाने पर उनके द्वारा पुराने आदेशों का हवाला दिया गया। आरोप है कि अधिकारियों की ओर से स्पष्ट कार्रवाई की जानकारी देने के बजाय यह कहा गया कि उच्च स्तर से आदेश मिलने के बाद ही कार्रवाई की जाएगी. ऐसे में सवाल उठता है कि जब करोड़ों रुपए के प्रतिबंधित पटाखे लोग फोड़कर पर्यावरण को प्रदूषित कर देंगे तब विभाग किस व्यक्ति पर क्या करेगा करेगा
प्रतिबंधित पटाखों पर नियम क्या कहते हैं?
पटाखों की बिक्री और उपयोग को लेकर न्यायालयों तथा संबंधित प्राधिकरणों के निर्देश लागू हैं। इनके अंतर्गत प्रतिबंधित श्रेणी के पटाखों, निर्धारित मानकों से अधिक ध्वनि उत्पन्न करने वाले पटाखों और नियमों के विपरीत भंडारण एवं बिक्री पर रोक संबंधी प्रावधान हैं। साथ ही लड़ी या श्रृंखला वाले पटाखों तथा अनुमत मानकों के अनुरूप नहीं होने वाले पटाखों की बिक्री पर भी लागू निर्देशों के अनुसार कार्यवाही की जा सकती है। लेकिन बिलासपुर क्षेत्रीय पर्यावरण अधिकारी रश्मि श्रीवास्तव के द्वारा प्रतिबंधित पटाखे को लेकर अब तक कितनी बार और किसी व्यक्ति संस्था के खिलाफ कार्यवाही किया गया है यह तो जांच का विषय है.
दूसरी तरफ हरित पटाखों के नाम पर गैर-प्रमाणित उत्पादों की बिक्री भी जांच का विषय है। इसी तरह ऑनलाइन बिक्री, डिलीवरी और अस्पतालों, शैक्षणिक संस्थानों तथा अन्य संवेदनशील क्षेत्रों के आसपास पटाखों की बिक्री को लेकर लागू आदेशों का पालन सुनिश्चित करना आवश्यक है। हालांकि, इन प्रतिबंधों की सटीक सीमा और लागू शर्तें संबंधित न्यायालयीन आदेशों तथा प्रशासनिक निर्देशों के अनुसार निर्धारित होती हैं।
सांप निकलने के बाद लाठी पीटने वाली कहावत को पर्यावरण विभाग चरितार्थ करते नजर आ रहा है !
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार कि विभागीय स्तर पर पटाखों की जांच दीपावली से लगभग एक सप्ताह पहले किए जाने की परंपरा रही है, जबकि बाजार में कथित तौर पर प्रतिबंधित पटाखों की आवक और आपूर्ति पहले से शुरू हो जाती है। ऐसे में सवाल यह है कि यदि प्रतिबंधित पटाखों का भंडारण अभी से किया जा रहा है, तो समय रहते जांच और कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है.
त्योहारों के दौरान ध्वनि और वायु प्रदूषण का सीधा असर आम नागरिकों, बच्चों, बुजुर्गों तथा बीमार व्यक्तियों पर पड़ सकता है। ऐसे में केवल दीपावली के नजदीक औपचारिक जांच करने के बजाय समय रहते संयुक्त निरीक्षण, भंडारण की जांच और नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई जरूरी है।
जिम्मेदार विभागों की जवाबदेही तय हो
पटाखों के लाइसेंस, भंडारण, बिक्री और पर्यावरणीय मानकों से जुड़े मामलों में संबंधित विभागों की अलग-अलग जिम्मेदारियां हैं। इसलिए जिला प्रशासन, पुलिस, लाइसेंस जारी करने वाले प्राधिकरण और पर्यावरण विभाग को आपसी समन्वय से जांच करनी चाहिए। यदि रहवासी क्षेत्रों में प्रतिबंधित पटाखों के बड़े भंडार और उनकी आपूर्ति के आरोप सही पाए जाते हैं, तो नियमानुसार तत्काल कार्रवाई की जानी चाहिए। फिलहाल पर्यावरण विभाग को प्रतिबंधित फटकों की जांच एवं कार्यवाही के लिए सजग होने की आवश्यकता है.