कोरोना काल मेरे लिए परीक्षा काल था, FIR दर्ज होना मेरे लिए गोल्ड मेडल” — शैलेश पांडे ‘हमार पहुना’ कार्यक्रम में पूर्व विधायक ने साझा किया शिक्षा से राजनीति तक का सफर; भूपेश बघेल को दिया राजनीति में लाने का श्रेय
“कोरोना काल मेरे लिए परीक्षा काल था, FIR दर्ज होना मेरे लिए गोल्ड मेडल” — शैलेश पांडे
‘हमार पहुना’ कार्यक्रम में पूर्व विधायक ने साझा किया शिक्षा से राजनीति तक का सफर; भूपेश बघेल को दिया राजनीति में लाने का श्रेय
न्यूज़ छत्तीसगढ़ टुडे (संतोष साहू)
बिलासपुर – प्रेस क्लब के परंपरागत कार्यक्रम ‘हमार पहुना’ में पूर्व विधायक शैलेश पांडे शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने अपने पारिवारिक जीवन, शिक्षा के क्षेत्र में बिताए वर्षों, राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस योजना से जुड़े अनुभवों और राजनीतिक सफर पर पत्रकारों के साथ विस्तार से चर्चा की। कार्यक्रम में उन्होंने कोरोना काल के अपने अनुभवों को साझा करते हुए कहा, “कोरोना काल मेरे लिए परीक्षा काल था और एफआईआर दर्ज होना मेरे लिए गोल्ड मेडल।” उनके इस बयान ने कार्यक्रम के दौरान विशेष ध्यान आकर्षित किया।
20 साल शिक्षा के क्षेत्र में बिताए, फिर राजनीति में रखा कदम
पूर्व विधायक शैलेश पांडे ने बताया कि उन्होंने अपने जीवन के करीब 20 वर्ष शिक्षा के क्षेत्र में बिताए। इसके बाद उनके राजनीतिक सफर की शुरुआत हुई। उन्होंने राजनीति में आने का श्रेय पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को देते हुए कहा कि उन्हें राजनीति में लाने में भूपेश बघेल की महत्वपूर्ण भूमिका रही। वहीं, टीएस सिंहदेव और डॉ. चरणदास महंत को उन्होंने अपना राजनीतिक मार्गदर्शक बताया।
पांडे ने अपने अनुभव साझा करते हुए शिक्षा के क्षेत्र से राजनीति तक पहुंचने के सफर और इस दौरान मिले मार्गदर्शन का उल्लेख किया।
राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस योजना में 10 साल किया काम
शैलेश पांडे ने बताया कि उन्होंने राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस योजना (NeGP) में 10 वर्षों तक कार्य किया। भारत सरकार की इस महत्वपूर्ण पहल को 18 मई 2006 को मंजूरी दी गई थी। इसका उद्देश्य सरकारी सेवाओं को इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से आम नागरिकों तक पहुंचाना, प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता बढ़ाना और सरकारी सेवाओं को अधिक सुलभ बनाना था।
उन्होंने डिजिटल सेवाओं के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि तकनीक के माध्यम से नागरिकों को सरकारी सुविधाओं और जानकारियों तक आसानी से पहुंच उपलब्ध कराना समय की महत्वपूर्ण जरूरत है।
भुइयाँ सॉफ्टवेयर से जमीन के रिकॉर्ड तक आसान पहुंच
कार्यक्रम में पूर्व विधायक ने छत्तीसगढ़ के भुइयाँ सॉफ्टवेयर का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि इस व्यवस्था के माध्यम से आम नागरिक अपनी जमीन से संबंधित राजस्व रिकॉर्ड, बी-1, बी-2 और अन्य जानकारियां ऑनलाइन देख सकते हैं।
पांडे के अनुसार, इस परियोजना को आगे बढ़ाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही और इसकी शुरुआत पाटन विधानसभा क्षेत्र से हुई थी। उन्होंने इसे कांग्रेस शासनकाल की एक महत्वपूर्ण पहल बताते हुए कहा कि आज प्रदेशभर के लोग इस व्यवस्था से लाभान्वित हो रहे हैं।
भुइयाँ सॉफ्टवेयर के माध्यम से जमीन के रिकॉर्ड की ऑनलाइन उपलब्धता ने नागरिकों के लिए राजस्व संबंधी जानकारियां प्राप्त करना आसान बनाया है। इससे लोगों को जमीन के दस्तावेजों से जुड़ी जानकारी हासिल करने में डिजिटल माध्यम का लाभ मिल रहा है।
बेटी की बात सुनकर हुक्का बार बंद कराने के लिए उठाई आवाज
पूर्व विधायक शैलेश पांडे ने हुक्का बार बंद कराने के मुद्दे से जुड़ा एक व्यक्तिगत अनुभव भी साझा किया। उन्होंने बताया कि उन दिनों उनकी बेटी दसवीं कक्षा में पढ़ती थी। एक दिन बेटी ने उन्हें बताया कि उसकी कक्षा के कुछ बच्चे हुक्का बार में जाकर हुक्का पीने जाते हैं।
पांडे के मुताबिक, इस बात ने उन्हें युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचाने के लिए आवाज उठाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि इसके बाद उन्होंने छत्तीसगढ़ विधानसभा में हुक्का बार बंद कराने का मुद्दा उठाया। उन्होंने यह भी बताया कि इस दिशा में कार्रवाई की शुरुआत बिलासपुर जिले से की गई थी।
उन्होंने युवाओं को नशे से बचाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए इस मुद्दे को सामाजिक जिम्मेदारी से जुड़ा विषय बताया।
कोरोना काल के अनुभवों पर भी खुलकर बोले
कार्यक्रम के दौरान शैलेश पांडे ने कोरोना काल को अपने लिए परीक्षा की घड़ी बताया। इसी संदर्भ में उन्होंने एफआईआर दर्ज होने को ‘गोल्ड मेडल’ की संज्ञा दी। उनका यह बयान उस दौर के अपने अनुभवों और राजनीतिक संघर्ष के प्रति उनके नजरिये को दर्शाता है।
‘हमार पहुना’ कार्यक्रम में पूर्व विधायक ने शिक्षा, डिजिटल शासन व्यवस्था, राजनीतिक मार्गदर्शन और सामाजिक मुद्दों से जुड़े अपने अनुभव पत्रकारों के साथ साझा किए। कार्यक्रम में उनके राजनीतिक सफर के साथ-साथ ई-गवर्नेंस और युवाओं को नशे से बचाने के लिए उठाए गए मुद्दों की भी चर्चा हुई।