कोरमी सरपंच पद से पृथक करने के आदेश पर अपील, सुनवाई की प्रक्रिया पर सवाल! पेशी की तारीख में कथित फेरबदल और शिकायतकर्ता को नोटिस नहीं मिलने की चर्चा, 30 अक्टूबर को एकपक्षीय आदेश की तैयारी? आदिवासी आरक्षित सीट का मामला, अपीलार्थी कि जाति प्रमाण पत्र कि जांच जरूरी!
कोरमी सरपंच पद से पृथक करने के आदेश पर अपील, सुनवाई की प्रक्रिया पर सवाल!
पेशी की तारीख में कथित फेरबदल और शिकायतकर्ता को नोटिस नहीं मिलने की चर्चा, 30 अक्टूबर को एकपक्षीय आदेश की तैयारी?
आदिवासी आरक्षित सीट का मामला, अपीलार्थी कि जाति प्रमाण पत्र कि जांच जरूरी!

न्यूज़ छत्तीसगढ़ टुडे (संतोष साहू )
बिलासपुर- जनपद पंचायत बिल्हा के अंतर्गत ग्राम पंचायत कोरमी की तत्कालीन सरपंच सुंदरी धुरी को पद से पृथक करने के मामले में अब जिला कलेक्टर के समक्ष दायर अपील की सुनवाई प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं। अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), बिलासपुर द्वारा छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम, 1993 की धारा 40 के तहत पारित आदेश को चुनौती देते हुए प्रस्तुत अपील में शिकायतकर्ता दुर्गेश्वरी मरकाम को सुनवाई का नोटिस तामील नहीं होने की चर्चा है। आरोप है कि निर्धारित पेशी की तारीख में बदलाव कर बीच में दो अन्य तारीखों पर सुनवाई रखी गई। मामले को 30 अक्टूबर 2026 को एकपक्षीय आदेश के लिए रखे जाने की बात सामने आ रही है। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि और संबंधित पक्षों का पक्ष सामने आना अभी बाकी है।
आदिवासी आरक्षित सीट पर चुनाव, जाति को लेकर हुई थी शिकायत
ग्राम पंचायत कोरमी में 20 फरवरी 2025 को सरपंच पद के लिए चुनाव संपन्न हुआ था। यह सीट अनुसूचित जनजाति वर्ग की महिला के लिए आरक्षित थी। चुनाव में सुंदरी धुरी ने जीत दर्ज की, जबकि दूसरे स्थान पर रहीं दुर्गेश्वरी मरकाम ने उनकी जाति को लेकर सवाल उठाते हुए जिला निर्वाचन अधिकारी, अनुसूचित जाति एवं जनजाति आयोग तथा मुख्यमंत्री के समक्ष लिखित शिकायत प्रस्तुत की थी।
शिकायत के आधार पर नायब तहसीलदार, बिलासपुर से प्रतिवेदन प्राप्त किया गया। इसके बाद संबंधित राजस्व अधिकारी द्वारा छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम की धारा 40 के तहत कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई। तत्कालीन सरपंच को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने का अवसर दिए जाने की बात भी सामने आई. वही 15 मई 2026 को सरपंच पद से पृथक करने का आदेश जारी किया गया था.
अपीलीय सुनवाई में नोटिस तामील को लेकर सवाल
एसडीएम के आदेश के विरुद्ध सुंदरी धुरी ने जिला कलेक्टर के समक्ष अपील प्रस्तुत की है। यह मामला एक अपर कलेक्टर के न्यायालय में सुनवाई के लिए रखा गया है। अब सुनवाई की प्रक्रिया को लेकर चर्चा है कि शिकायतकर्ता दुर्गेश्वरी मरकाम को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार नोटिस तामील नहीं हुआ।
यदि किसी प्रभावित पक्ष को सुनवाई का उचित अवसर दिए बिना एकपक्षीय आदेश पारित किया जाता है, तो इससे प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के पालन पर सवाल उठ सकते हैं। हालांकि, नोटिस जारी होने, तामील होने और सुनवाई की वास्तविक स्थिति का पता न्यायालयीन अभिलेखों से ही लगाया जा सकता है।
विभाग का बाबू या फिर जादूगर? पेशी की तारीखों पर उठे सवाल

मामले में पेशी की तारीखों को लेकर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, 3 सितंबर 2026 को सुनवाई के बाद अगली तारीख 23 अक्टूबर 2026 निर्धारित किए जाने की बात कही जा रही है। आरोप है कि इसके बाद 14 अक्टूबर और 21 अक्टूबर 2026 को भी पेशी की तारीखें रखी गईं।
यदि निर्धारित तारीख में बदलाव कर नई तारीखें तय की गई थीं, तो सवाल उठता है कि इसकी सूचना दोनों पक्षों को किस माध्यम से दी गई और क्या संबंधित न्यायालय के आदेश-पत्र में इसका स्पष्ट उल्लेख है? क्या तारीखों में बदलाव नियमानुसार किया गया या किसी स्तर पर लापरवाही हुई? इन सवालों का जवाब न्यायालयीन रिकॉर्ड और संबंधित अधिकारियों के स्पष्टीकरण से ही मिल सकता है।
इस मामले में एक कर्मचारी की भूमिका को लेकर भी आरोप और चर्चाएं हैं। तारीखों में कथित बदलाव के पीछे का उद्देश्य अपीलार्थी को लाभ पहुंचाना है. और वह लाभ एक पक्षीय आदेश कराना है. इस कार्य की एवज मे बाबू के साथ रस्म अदाई होने कि चर्चा है. लेकिन इस संबंध में कोई प्रमाणित दस्तावेज या आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है। इसलिए आरोपों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
आरक्षित सीट का मामला, जाति प्रमाण पत्र की जांच जरूरी
यह पूरा प्रकरण अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित सरपंच पद से जुड़ा है। ऐसे में अपीलीय प्राधिकारी के समक्ष यह महत्वपूर्ण प्रश्न है कि चुनाव के समय संबंधित प्रत्याशी की पात्रता के समर्थन में कौन-कौन से दस्तावेज प्रस्तुत किए गए थे और सक्षम प्राधिकारी द्वारा उनका परीक्षण किया गया था या नहीं।
यदि जाति प्रमाण पत्र अथवा पात्रता से संबंधित दस्तावेजों पर विवाद है, तो न्यायालयीन रिकॉर्ड के आधार पर उनका परीक्षण किया जाना चाहिए। साथ ही, अपील की सुनवाई में शिकायतकर्ता को नियमानुसार सूचना देकर अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाना भी महत्वपूर्ण है।
अब 30 अक्टूबर की सुनवाई पर निगाहें
30 अक्टूबर 2026 को प्रस्तावित सुनवाई में क्या आदेश पारित होता है, इस पर सभी की निगाहें टिकी हैं। क्या अपीलीय न्यायालय पहले नोटिस तामील और सुनवाई की प्रक्रिया स्पष्ट करेगा? क्या जाति संबंधी दस्तावेजों की जांच की जाएगी? और क्या पेशी की तारीखों में कथित बदलाव को लेकर संबंधित कर्मचारियों से जवाब मांगा जाएगा?
इन सवालों का उत्तर आने वाले आदेश और आधिकारिक रिकॉर्ड से ही स्पष्ट होगा। फिलहाल, मामले में पारदर्शी सुनवाई, दोनों पक्षों को उचित अवसर और आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग महत्वपूर्ण बनी हुई है।

