नाबालिक छात्रा के पालक कि शिकायत पर शिक्षक कमलेश साहू के खिलाफ प्रशासकीय कार्यवाही के बाद अब कानूनी कार्यवाही कि संभावना ?

नाबालिक छात्रा के पालक कि शिकायत पर शिक्षक कमलेश साहू के खिलाफ प्रशासकीय कार्यवाही के बाद अब कानूनी कार्यवाही कि संभावना ?

नाबालिक छात्रा के पालक कि शिकायत पर शिक्षक कमलेश साहू के खिलाफ प्रशासकीय कार्यवाही के बाद अब कानूनी कार्यवाही कि संभावना ?

 

 

 

 

न्यूज़ छत्तीसगढ़ टुडे (संतोष साहू )

बिलासपुर – विकासखंड बिल्हा के अंतर्गत संचालित एक शासकीय स्कूल पर पदस्थ तत्कालीन शिक्षक के खिलाफ अध्ययनरत छात्रा की पालक ने विकासखंड शिक्षा अधिकारी बिल्हा जिला बिलासपुर के समक्ष लिखित शिकायत किया था. जिसके बाद मामले पर जांच किया गया एवं विधिवत प्रक्रिया पूर्ण करते हुए प्रशासन ने तत्कालीन शिक्षक कमलेश साहू के खिलाफ शासकीय सेवा से पदच्युत कि कार्यवाही किया गया. उक्त कार्यवाही को लेकर कहां जा रहा है कि प्रशासनिक कार्यवाही तो किया गया लेकिन कानूनी कार्यवाही किया जाना रहा. चुकी मामला नाबालिक लड़की से जुड़ा हुआ है.

 

30 जनवरी 2025 को शिक्षक कमलेश साहू के खिलाफ शिकायत किया गया. शिकायतकर्ता पालक के अनुसार उनकी पुत्री विकासखंड बिल्हा के अंतर्गत एक शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला में अध्यनरत थी इसी दरमियान उक्त स्कूल पर शिक्षक कमलेश साहू बतौर पदस्थ थे.आरोप है कि उक्त शिक्षक के द्वारा उनकी पुत्री को मोबाइल पर फोन एवं आपत्तिजनक मैसेज किया गया. उक्त शिकायत में मामले पर विधिवत जांच किया गया. जिसमे की तत्कालीन शिक्षक कमलेश साहू के खिलाफ कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी बिलासपुर से अनुमोदन के बाद आर. पी.आदित्य (संयुक्त संचालक शिक्षा संभाग बिलासपुर ) ने दिनांक 7. 2. 2025 को आदेश पारित करते हुए कहां की शिक्षक कमलेश साहू को शासकीय सेवा से पदच्युत (Dismissal from service) किया जाता है.कार्यवाही को लगभग 2 माह बीत जाने के बाद अब यह चर्चा हो रही है कि मामले में प्रशासकीय कार्यवाही किया गया. लेकिन दूसरी ओर पोक्सो एक्ट के तहत कार्यवाही किया जाना था.

 

शासकीय सेवा से बर्खास्त पूर्व शिक्षक कमलेश साहू के खिलाफ अब (पोक्सो एक्ट) के तहत कानूनी कार्यवाही होने कि संभावना ?

शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला में पदस्थ तत्कालीन शिक्षक कमलेश साहू के खिलाफ एक छात्रा की पालक ने गंभीर आरोप लगाया था. जिसके बाद प्रशासनिक स्तर पर तत्कालीन शिक्षक के खिलाफ शासकीय सेवा से पदच्युत कि कार्यवाही किया गया. लेकिन कानूनी कार्यवाही अब तक नहीं किया गया है. उक्त मामले के संबंध में मीडिया ने जब महिला बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी सुरेश सिंह से चर्चा किया तब मामले की गंभीरता को देखते हुए अविलम्ब एवं तत्परता से विभाग के संबंधित अधिकारियों को मामले के जाँच हेतु निर्देशित किया है

 

वही विधिक जानकारो का कहना है कि पोक्सो एक्ट अधिनियम 2012 कि धारा 12 के तहत मामले पर अपराध पंजीकृत किया जाना रहा लेकिन ऐसा नहीं किया गया. पोक्सो एक्ट अधिनियम यहां भी कहता है कि जिस किसी व्यक्ति को इस घटना के संबंध में जानकारी हो उसे अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करते हुए संबंधित थाने में एफआईआर दर्ज करना है. इसी केस से संबंधित दूसरे पहलू पर बात किया जाए तो प्रार्थी पालक ने ब्लॉक शिक्षा अधिकारी सुनीता ध्रुव के समक्ष दिनांक 30 जनवरी 2025 को लिखित शिकायत आवेदन पत्र प्रस्तुत किया था. सूत्रों से जानकारी के अनुसार ऐसे मामलों में 24 घंटे के भीतर घटना को लेकर संबंध थाने में अपराध पंजीबद्ध दर्ज कराना होता है लेकिन उक्त मामले पर ऐसा नहीं किया गया है.

 

पोक्सो एक्ट अधिनियम के बारे में यह भी बताया जाता है कि तथ्यों की जानकारी होने के बाद भी जानकारी को छिपाना अपराध की श्रेणी में आता है जिसके लिए 1 वर्ष सजा का प्रावधान निर्धारित किया गया है. बहरहाल देखने वाली बात होगी कि मामले पर महिला बाल विकास विभाग के जिम्मेदार अधिकारी कब तक जांच पूर्ण कर पाते हैं.

संतोष साहू मोबाइल. +919827329895

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