एस. ई. सी. एल. दिपका विस्तार परियोजना में फर्जी दस्तावेज के सहारे नौकरी करने पर शिकायत 

एस. ई. सी. एल. दिपका विस्तार परियोजना में फर्जी दस्तावेज के सहारे नौकरी करने पर शिकायत 
एस. ई. सी. एल. दिपका विस्तार परियोजना में फर्जी दस्तावेज के सहारे नौकरी करने पर शिकायत 
न्यूज़ छत्तीसगढ़ टुडे (संतोष साहू )
बिलासपुर – देश के सम्मानित संस्थान एस. ई. सी. एल दिपका विस्तार परियोजना में फर्जी दस्तावेज के सहारे नौकरी करने का मामला प्रकाश में आया  हैं.  जिसको लेकर मुख्यालय बिलासपुर में लिखित शिकायत किया गया  है. पूरे मामले पर बहुत जल्द जांच होने की संभावनाएं बताई जा रही है.
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ प्रदेश में आदिवासियों को प्रदेश का मूल निवासी माना जाता है साथ ही उन्हें आर्थिक व शैक्षणिक दृष्टि से कमजोर व पिछड़ा जानकर  उनकी आर्थिक व शैक्षणिक स्थिति में सुधार लाने के उद्देश्य से शासकीय नौकरियां उन्हें आसानी से मिले. इसलिए उन्हें आरक्षण के आधार पर नौकरी प्राप्त करने के लिए खासा छूट शासन ने प्रदान किया है।लेकिन आरक्षण का लाभ वास्तविक में आदिवासियों को कितना प्राप्त हुआ है यह बता पाना थोड़ा मुश्किल है लेकिन कुछ लोग जो कि सामान्य वर्ग, अन्य पिछड़ा वर्ग,  होते हुए भी फर्जी तरीके से अनुसूचित जनजाति का कूट रचित दस्तावेज बनवा कर आसानी से शासकीय नौकरियां प्राप्त कर मजे मार रहे हैं।जिसकी जानकारी विभाग के उच्च अधिकारियों को भी नहीं रहती है
ऐसा ही कुछ मामला प्रकाश में आया है. जिसमे कि फर्जी दस्तावेज के सहारे  एस. ई. सी. एल दिपका विस्तार परियोजना में एक कर्मचारी की पदस्थापना बताई जा रही है.पूरे मामले को लेकर लिखित शिकायत किया गया है. शिकायतकर्ता सुमित कुमार का आरोप है कि गेवरा क्षेत्र अंतर्गत अधिग्रहित जमीन के एवज में  संतोष सिंह पिता  शत्रुहन सिंह को रोजगार प्रदान किया गया है. जिसकी प्रतिस्थापन नियुक्ति पत्र के अनुसार दीपिका विस्तार परियोजना पर है शिकायतकर्ता का यह भी आरोप लगाया है कि जिस भूमि कि  अधिग्रहण के एवज  में नौकरी दिया गया है वह  असल में मधुराखन  सिंग पिता ठाकुर सिंग ग्राम बिंझस  दिपका जिला कोरबा छत्तीसगढ़ के हक की जमीन थी. जिसे एस. ई. सी. एल गेवरा क्षेत्र द्वारा उक्त भूमि को अर्जित किया जा चुका है. जिसके एवज में खातेदार या उसके आश्रितों को परियोजना में नौकरी एवं अन्य सुविधाएं दिए जाने का प्रावधान है. आरोप है कि संतोष सिंह के द्वारा कूट रचित दस्तावेज बनाकर  मदुराखन सिंह का वारिस बताया गया है.  जबकि नौकरी करने वाला राजपूत वर्ग से ताल्लुक रखता है  एवं उक्त भूमि स्वामी मदुराखन सिंग आदिवासी है.
अगर शिकायतकर्ता के  आरोप मे  किसी प्रकार की सत्यता होती है तो मामला बड़ा ही गंभीर है. इस तरह के मामले को देख कर एक बड़ा सवाल यह उठता है कि छत्तीसगढ़ प्रदेश को आदिवासी  मुख्यमंत्री तो मिल चुका है लेकिन क्या आदिवासियों को उनका वास्तविक अधिकार मिल पाएगा. या फिर आदिवासियों के हक को फर्जी दस्तावेज के सहारे हथियाना का सिलसिला निरंतर जारी रहेगा. 

संतोष साहू मोबाइल. +919827329895

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *