प्रदेश के डिप्टी सीएम अरुण साव के गृह जिला पर किसान धान बेचने से  वंचित,  मंडी प्रबंधक समक्ष किसान लगाता रहा गुहार   मंडी प्रबंधक के तानाशाह रवैया से नही बीका धान, किसान का हो गया लाखो रुपय का नुकसान  

प्रदेश के डिप्टी सीएम अरुण साव के गृह जिला पर किसान धान बेचने से  वंचित,  मंडी प्रबंधक समक्ष किसान लगाता रहा गुहार     मंडी प्रबंधक के तानाशाह रवैया से नही बीका धान, किसान का हो गया लाखो रुपय का नुकसान  
प्रदेश के डिप्टी सीएम अरुण साव के गृह जिला पर किसान धान बेचने से  वंचित,  मंडी प्रबंधक समक्ष किसान लगाता रहा गुहार  
मंडी प्रबंधक के तानाशाह रवैया से नही बीका धान, किसान का हो गया लाखो रुपय का नुकसान  
न्यूज़ छत्तीसगढ़ टुडे ( संतोष साहू )
मुंगेली –  प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने किसानों के हित में बड़ा फैसला लेते हुए धान खरीदी की अंतिम तिथि को 31 जनवरी से बढ़कर 4 फरवरी कर दिया था। ताकि किसान अपना धान आसानी से बेच सके। लेकिन किसानों के हित में मुख्यमंत्री द्वारा लिया गया निर्णय  जिला मुंगेली के एक प्रबंधक को रास नहीं आया और धान खरीदी का समय अवधि बढ़ाने के बाद भी  एक किसान से जानबूझकर धान नहीं खरीदा गया।
एक पुरानी कहावत है कि दिया तले अंधेरा अर्थात  अपने आस पास के स्थान को दिया प्रकाश देकर रोशनी प्रदान करता है. लेकिन जिस जगह पर वह रखा जाता है  वहां के निचले सतह मे अंधेरा छाया रहता है.  कुछ इसी तरह कि दास्ता छत्तीसगढ़ प्रदेश की राजनीति में डिप्टी सीएम की भूमिका निभाने वाले अरुण साव कि राजनीतिक परिस्थितिया बयां करती नजर आ रही है 
दरअसल पूरा मामला छत्तीसगढ़ प्रदेश के डिप्टी सीएम अरुण साव के गृह जिला का है  बताया जाता है कि मुंगेली जिला का पथरिया ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत लौदा स्थित है। गौरतलब है कि गांव में ही धान खरीदी समिति केंद्र भी मौजूद है जिसमें गांव के  बिरझू  साहू पिता जुगरू साहू उम्र लगभग 72 वर्ष वार्ड क्रमांक 6 निवासी मूलतः किसान है उसने धान बेचने के लिए नियमतः अपना पंजीयन कराया था फसल काटने के बाद उसने अपने धान को बेचने के लिए ग्राम पंचायत लौदा में  स्थित धान खरीदी केंद्र पर संपर्क किया। बताया जाता है कि किसान बिरझु को टोकन के लिए देने के लिए  टालमटोल किया जा रहा था। उक्त धान खरीदी केंद्र समिति के जिम्मेदार अधिकारी, कर्मचारी के द्वारा लगातार टोकन देने के लिए टालमटोल किए जाने पर किसान ने विरोध किया. तब उसे संतुष्ट करने के लिए 29 जनवरी का टोकन काटा गया। जब निर्धारित समय अवधि पर किसान अपना धान बेचने के उद्देश्य से तौल कराने ट्रैक्टर पर भरकर धान को मंडी ले गया तब मंडी प्रबंधक ने यह कहते हुए धान खरीदने से इनकार कर दिया कि तुम्हारा धान पानी पड़ने के कारण खराब हो गया है हम नहीं खरीदेंगे। इस प्रकार के बेतुके फरमान के कारण किसान का धान नही बीका और आज इस वजह से किसान आर्थिक तंगी से परेशान है।
किसान ने कुदरत के कहर (बीमारी) से धान को बचा लिया, मंडी मे बैठे दीमक से कौन बचाएगा ?
किसान का धान खराब या फिर मंडी में बैठे दीमक कि नियत 
किसान से धान नहीं खरीदने के लिए मंडी प्रबंधक द्वारा बनाए गए बहाना पर एक बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या पूरे गांव में सिर्फ किसान बिरजू साहू के लिए पानी गिरा था जिसके कारण उसकी फसल कि गुणवत्ता को खराब होना बताया गया है। या फिर प्रबंधक द्वारा धान को खराब बताने के पीछे कोई मनसा रही होगी जो पूरी नहीं हो पाया शायद इसलिए गरीब किसान का धान क्रय नही किया गया. इस पुरे मामले पर कयास लगा पाना मुश्किल है  कि किसान के धान या फिर किसी की नियत खराब हो गई थी । 
अब मामले पर देखना होगा कि अपने आप को किसान की हितायसी बता कर राग अलापने वाली भारतीय जनता पार्टी के कार्यकाल में धान खरीदी केंद्र लौदा पर जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ किसी प्रकार कि जॉच, कार्यवाही किया जाता है या फिर किसान को  न्याय के लिए विपक्ष साथ देता है

संतोष साहू मोबाइल. +919827329895

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