विधानसभा में प्रश्न काल के दरमियान कथित निष्क्रिय विधायक की भूमिका निभाने वाले अमर अग्रवाल को क्या मिलेगा मंत्री पद? छत्तीसगढ़ में चार मंत्रियों को बदलने की सोशल मीडिया पर चर्चा, अलग-अलग संभागों से नए चेहरों को मौका मिलने की अटकलें!
विधानसभा में प्रश्न काल के दरमियान कथित निष्क्रिय विधायक की भूमिका निभाने वाले अमर अग्रवाल को क्या मिलेगा मंत्री पद?
छत्तीसगढ़ में चार मंत्रियों को बदलने की सोशल मीडिया पर चर्चा, अलग-अलग संभागों से नए चेहरों को मौका मिलने की अटकलें!
न्यूज़ छत्तीसगढ़ टुडे (संतोष साहू)
बिलासपुर – छत्तीसगढ़ की सियासत में इन दिनों संभावित मंत्रिमंडल फेरबदल को लेकर चर्चाएं तेज हैं। सोशल मीडिया पर प्रदेश के चार मंत्रियों को बदले जाने और चार अलग-अलग संभागों से नए चेहरों को मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने की अटकलें लगाई जा रही हैं। इसी बीच बिलासपुर शहर के भाजपा विधायक अमर अग्रवाल का नाम भी संभावित मंत्री के रूप में चर्चा में आने की बात कही जा रही है। हालांकि, इस संबंध में अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं है। लेकिन यदि इन चर्चाओं पर मुहर लगती है, तो अमर अग्रवाल की विधानसभा में भूमिका को लेकर कांग्रेस द्वारा पहले लगाए गए आरोप एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ सकते हैं।
44 बैठकों में एक भी सवाल नहीं पूछने का कांग्रेस का आरोप
छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव 2023 के बाद भारतीय जनता पार्टी ने प्रदेश में सत्ता में वापसी की और सरकार बनाई। नई सरकार के गठन के बाद फरवरी-मार्च 2024 से फरवरी-मार्च 2025 तक विधानसभा के विभिन्न सत्र आयोजित हुए। इन सत्रों में हुई बैठकों का हवाला देते हुए कांग्रेस ने बिलासपुर विधायक अमर अग्रवाल की विधायी सक्रियता पर सवाल उठाए थे।
उपलब्ध विवरण के अनुसार, फरवरी-मार्च 2024 में विधानसभा की 19 बैठकें, जुलाई 2024 में पांच, दिसंबर 2024 में चार और फरवरी-मार्च 2025 के बजट सत्र में 16 बैठकें हुईं। इस तरह कुल 44 बैठकों का उल्लेख किया गया था.
कांग्रेस पदाधिकारियों ने कुछ दिन पहले आयोजित प्रेस वार्ता में आरोप लगाया था कि इन बैठकों के दौरान बिलासपुर शहर के विधायक अमर अग्रवाल ने एक भी प्रश्न नहीं पूछा। कांग्रेस ने इसे विधानसभा में उनकी निष्क्रिय भूमिका से जोड़ते हुए जनता के मुद्दों को सदन में उठाने को लेकर सवाल खड़े किए थे। हालांकि, शून्य प्रश्न पूछे जाने के दावे की आधिकारिक विधानसभा रिकॉर्ड से पुष्टि होना आवश्यक है।
मंत्री पद की लालसा में जनता के मुद्दों से दूरी बनाने का आरोप
कांग्रेस ने अपने आरोपों में यह भी दावा किया था कि अमर अग्रवाल ने मंत्री पद की उम्मीद में जनता की समस्याओं को विधानसभा में उठाने से परहेज किया। विपक्ष के इस आरोप ने राजनीतिक हलकों में सवाल खड़ा किया है कि क्या किसी विधायक की प्राथमिकता अपने क्षेत्र की समस्याओं को सदन में उठाना होनी चाहिए या मंत्रिमंडल में जगह पाने की संभावनाएं.
हालांकि, मंत्री पद की लालसा में जनता के मुद्दों से दूरी बनाने का आरोप कांग्रेस की राजनीतिक टिप्पणी है। इसे प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता, जब तक इसके समर्थन में ठोस साक्ष्य सामने न आएं। वहीं, विधायक की सक्रियता का आकलन करने के लिए प्रश्नों के अलावा सदन में उपस्थिति, बहस, ध्यानाकर्षण प्रस्ताव और अन्य विधायी गतिविधियों को भी देखना जरूरी है।
अब मंत्री पद की चर्चा, तो पुराने आरोपों पर भी निगाहें
अमर अग्रवाल का नाम संभावित मंत्रियों की चर्चा में आने से बिलासपुर की राजनीति में उत्सुकता बढ़ गई है। यदि उन्हें मंत्रिमंडल में शामिल किया जाता है, तो यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस उनके पुराने विधायी प्रदर्शन को लेकर उठाए गए सवालों को किस तरह आगे बढ़ाती है।
दूसरी ओर, यदि अमर अग्रवाल को मंत्री पद मिलता है, तो उनके सामने बिलासपुर की जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरने के साथ अपनी राजनीतिक और विधायी भूमिका को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब देने की चुनौती भी होगी।
फिलहाल, चार मंत्रियों को बदले जाने और अमर अग्रवाल को मंत्री बनाए जाने की चर्चाओं पर आधिकारिक मुहर नहीं लगी है। ऐसे में यह कहना जल्दबाजी होगी कि कांग्रेस के आरोप प्रमाणित हो गए हैं। लेकिन संभावित मंत्रिमंडल फेरबदल ने एक सवाल जरूर खड़ा कर दिया है—क्या विधानसभा में कथित निष्क्रियता के आरोपों के बीच अमर अग्रवाल को मंत्री पद की जिम्मेदारी मिलेगी, या फिर यह चर्चा महज सियासी अटकल साबित होगी.